LIVE UPDATE
झमाझम खबरेंदुनियादेशप्रदेशराजनीतीरायपुर

संलग्नीकरण बंद… लेकिन ‘सेटिंग’ चालू! DEO ने नियमों को कुचला, बिना किसी आदेश के व्याख्याता को जिला नोडल अधिकारी बनाकर कार्यालय में किया संलग्न

संलग्नीकरण बंद… लेकिन ‘सेटिंग’ चालू! DEO ने नियमों को कुचला, बिना किसी आदेश के व्याख्याता को जिला नोडल अधिकारी बनाकर कार्यालय में किया संलग्न

उल्लास साक्षरता मिशन के नाम पर बड़ा खेल? विभागीय आदेश ने ही बता दी पूरी ‘अंदरूनी कहानी’

ये खबर भी पढ़ें…
डिपुटेशन का ‘गोलमाल’ या सुनियोजित खेल ? बचरवार में सेवा रहा, मरवाही से वेतन—प्राचार्य शैलेन्द्र अग्निहोत्री के मामले ने खोली विभाग की पोल”
डिपुटेशन का ‘गोलमाल’ या सुनियोजित खेल ? बचरवार में सेवा रहा, मरवाही से वेतन—प्राचार्य शैलेन्द्र अग्निहोत्री के मामले ने खोली विभाग की पोल”
March 29, 2026
“डिपुटेशन का ‘गोलमाल’ या सुनियोजित खेल ? बचरवार में सेवा रहा, मरवाही से वेतन—प्राचार्य शैलेन्द्र अग्निहोत्री के मामले ने खोली...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही। जिले के शिक्षा विभाग में एक बार फिर नियमों को ताक पर रखकर की जा रही मनमानी उजागर हुई है। राज्य शासन द्वारा संलग्नीकरण (अटैचमेंट) पूरी तरह समाप्त किए जाने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) द्वारा एक व्याख्याता को जिला स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपते हुए न केवल नियमों की अनदेखी की गई, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह पूरा मामला उल्लास साक्षरता मिशन के तहत जारी एक आदेश से सामने आया है, जिसमें जिला स्तरीय मॉनिटरिंग दल के गठन की आड़ में एक व्याख्याता को “जिला नोडल अधिकारी” बनाकर जिला शिक्षा कार्यालय में संलग्न दर्शाया गया है।

ये खबर भी पढ़ें…
खूनी हवाई हमला: निशाना बना पत्रकारों का ठिकाना, 3 की मौके पर ही मौत।
खूनी हवाई हमला: निशाना बना पत्रकारों का ठिकाना, 3 की मौके पर ही मौत।
March 29, 2026
लेबनान। दक्षिण लेबनान में इजरायल के एक हवाई हमले में शनिवार को तीन पत्रकार मारे गए. यह हमला उस वक्त...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

आदेश ही बना सबसे बड़ा सबूत

जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट रूप से श्री मुकेश कोरी (व्याख्याता) को जिला नोडल अधिकारी के रूप में दर्शाया गया है। इतना ही नहीं, आदेश में उनकी पदस्थापना जिला साक्षरता मिशन कार्यालय (DEO कार्यालय) में भी दिखाई गई है।

ये खबर भी पढ़ें…
बिलासपुर: कोटा के रतखंडी में रेत का ‘काला खेल’, ₹300 प्रति ट्रैक्टर वसूली का सनसनीखेज खुलासा
बिलासपुर: कोटा के रतखंडी में रेत का ‘काला खेल’, ₹300 प्रति ट्रैक्टर वसूली का सनसनीखेज खुलासा
March 29, 2026
बिलासपुर : बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड से अवैध रेत उत्खनन का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। ग्राम...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

लेकिन वास्तविक स्थिति कुछ और ही कहानी बयां करती है—

मुकेश कोरी की मूल पदस्थापना सेजेस धनौली में है उनके नाम पर राज्य शासन द्वारा कोई वैध नियुक्ति आदेश जारी नहीं हुआ किसी प्रकार की प्रतिनियुक्ति (डिपुटेशन) की स्वीकृति भी नहीं है ऐसे में यह पूरा मामला सीधे तौर पर नियमों के विपरीत नजर आता है।

DPI के आदेश के बाद भी ‘पावर प्ले’ जारी

इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बनाता है लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) का हालिया आदेश, जिसमें तीसरी बार स्पष्ट रूप से संलग्नीकरण समाप्त करने के निर्देश जारी किए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि, सभी संलग्न शिक्षकों एवं कर्मचारियों को तत्काल उनके मूल संस्थान में कार्यमुक्त किया जाए किसी भी प्रकार का अनाधिकृत अटैचमेंट स्वीकार्य नहीं होगा इसके बावजूद जिले में जारी यह आदेश कई सवाल खड़े करता है—

क्या DEO ने DPI के निर्देशों को नजरअंदाज किया? 

क्या जिले में ‘मनपसंद पोस्टिंग’ का खेल अब भी जारी है?क्या अधिकारी खुद को शासन के आदेशों से ऊपर मान रहे हैं?उल्लास मिशन या ‘पद वितरण मिशन’? उल्लास साक्षरता कार्यक्रम का उद्देश्य जहां नवसाक्षरों को शिक्षा से जोड़ना है, वहीं इस तरह के विवादास्पद आदेश योजना की मंशा पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार—

“यह सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि प्रभाव और नियंत्रण का मामला है।”“जिला स्तर पर बैठाकर प्रशासनिक फैसलों में भूमिका देने की रणनीति हो सकती है।”

स्कूलों पर असर: पढ़ाई कौन संभालेगा?

सबसे अहम सवाल जमीनी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठता है,जब एक व्याख्याता को बिना प्रक्रिया जिला मुख्यालय में बैठा दिया जाएगा,तो उसके मूल विद्यालय में पढ़ाई कौन करेगा? क्या इससे शिक्षकों की कमी और नहीं बढ़ेगी?यह सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ने वाला मामला है।

प्रशासन की चुप्पी, संदेह गहरा

इस पूरे मामले में अब तक जिला प्रशासन या उच्च अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। क्या यह मौन सहमति है? या फिर मामला दबाने की कोशिश? बड़े सवाल, जिनका जवाब जरूरी

बिना शासन अनुमति के नोडल अधिकारी की नियुक्ति कैसे हुई?

क्या अन्य योग्य शिक्षकों की अनदेखी की गई? क्या यह आदेश नियमों के खिलाफ होते हुए भी जानबूझकर जारी किया गया? क्या इस पर विभागीय जांच होगी? निष्कर्ष: नियम कमजोर या ‘जुगाड़’ मजबूत?यह मामला सिर्फ एक आदेश का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल है। जब शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद इस तरह की नियुक्तियां होती हैं, तो यह संदेश जाता है कि—

“नियम सिर्फ कागजों में हैं, असल में ‘जुगाड़’ ही सिस्टम चला रहा है।”

अब देखना यह है कि शासन इस गंभीर अनियमितता पर सख्ती दिखाता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

Back to top button
error: Content is protected !!